बदल गया रिश्ता कृष्णा से।


KINDLY READ. .. YOU WILL LIKE. LORD WANTS ME TO HAVE A NEW PERSPECTIVE TO LIFE.

बदल गया रिश्ता कृष्णा से।
बदल गया रिश्ता कृष्णा से…. Written by वासल देवेन्द्र.. D.K.Vasal
बदल गया रिश्ता कृष्णा से।

तूं भी तो कुछ,
चुनता होगा।
जैसे तूने,
चुना विदुर को।
अभिमन्यु को,
शिष्य चुना।
तूने ही तो,
चुना अर्जुन को।

सुदामा को,
तूने मित्र चुना।
ग्वालों को,
सखा तूने ही चुना।
देवकी वासुदेव,
को माता पिता।
और  चुना,
बलराम को,
भाई बड़ा।

तूं  राजा,
सारी सृष्टि का।
गुलाम भी तो,
चाहिए होगा।
चुन ले तूं मुझे,
गुलाम अपना।
है वासल देवेन्द्र, 
तेरे चरण पड़ा।

बदल दे मेरा,
रिश्ता तुझसे।
मैं कहां हूं,
तेरा भक्त बड़ा।
तूं मालिक मैं,
तेरा गुलाम।
तूं उपर,
मैं नीचे खड़ा।

शिकायत थी मेरी,
तब तक तुझ से।
जब तक था,
ऐसा रिश्ता तुझ से।
तूं भगवान,
मैं भक्त तेरा,

अब तूं मालिक,
और मैं गुलाम।
कहां शिकायत,
कर सकता गुलाम।

पूछे मैंने,
कई सवाल पर,
नां मिला,
मुझे उत्तर कोई।
बाद में आया,
समझ में मेरी,
पाना है,
अगर तुझे तो।
भक्त होना,
है नहीं जरूरी।
उससे अच्छा है,
रहो गुलाम,
गुलाम पर,
रहती नज़र तुम्हारी।

छोड़ो बात,
फर्जी भक्तों की।
जब तक,
नां हो इच्छा तेरी।
नहीं बन सकता,
कोई  तेरा गुलाम।
और नां कर सकता,
गुलामी तेरी।

गुलाम की नहीं,
होती कोई इच्छा।
नां होती,
उसकी कोई चाह।
नहीं गुलाम
कह सकता,
कभी भी,
हे कृष्णा,
तूं मालिक मेरा,
और मैं कृष्णा
हूं तेरा गुलाम।

ऐसा कुछ भी,
नहीं सृष्टि में।
गुलाम जिसे
कह सके वो मेरा।

नहीं बनाना,
मुझे सेवक अपना।
सेवक की होती,
है कुछ तो चाह।
गुलाम नहीं,
कर सकता है,
सेवा करने की भी चाह।

भक्त को रहती,
भक्ति की चाह।
और सेवक को, 
सेवा की चाह।
गुलाम की नहीं,
कोई अपनी चाह।
उसको बस,
सुनना आदेश।
जो भी हो,
मालिक का संदेश।

गुलाम के नहीं होते,
दिल और दिमाग।
नां होती,
उसकी मुस्कान।
उस को सुनना
बस आदेश।
उसके होते हैं
बस कान।

इसीलिए है,
प्रार्थना मेरी।
तूं बना लें,
मुझे अपना गुलाम।
जब तक चलें,
सांसें मेरी।
बस बना रहूं,
तेरा गुलाम।
नां मैं कुछ मांगू,
नां कुछ तूं दे।
बस तूं मालिक,
और मैं गुलाम।

बदल दे मेरा,
रिश्ता  तुझ से।
है वासल देवेन्द्र की,
आखिरी फरियाद।
*****

Published by Vasaldevenderpoetry

The Blogger D. K. Vasal ( Devender Kumar Vasal) is a renowned Lawyer. He was a Head of legal for STANDARD CHARTERED BANK India & other territories. General legal counsel for VEDANTA plc. A Senior partner in DSKlegal , one of the largest law firms. DK ( as populary known ) was a Chairman of ISSAGRO ASIA LTD. DK is a board of director on many companies. The Blogger वासल देवेन्द्र, vasaldk, DK Vasal, (DK) , is also a flautist. He learnt playing flute at the age of 60+ and now gives stage performances. वासल देवेन्द्र is also a poet and writes poems both in English and Hindi and many of them have been published in Magzines. His recent poem अक्षर ढाई has become very popular. At the age of 64 he ran 2 half marathons ( 21 KILOMETRES) one on October 4, 2020 (@ 6.33 and another on November 29, 2020. He is converting whole of Bhagvad Gita into poetry. The work is in progress and half of that has been completed. Contact detail , blog: vasaldk.blogspot.com Website : dkvasal.com Email : vasaldevenderpoetry@gmail.com Mobile: +919820347326

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