‘ ण’

‘ ण ‘ ….. written by वासल देवेन्द्र…D.K.VASAL‘ ण ‘संस्कृत में ‘ण’ हिंदी में न,ज़रा ध्यान से देखो समझो,क्या कमाल का है ये ण। ण बिना हैं कृष्ण अधूरे,ण बिना अधूरे विष्णु,ण बिना नां नारायण,ण बिना नां कोई वैकुणठ।ण बिना अधूरा ब्रम्हाणड,ण बिना नां वेद उच्चारण,ण बिना नां कोई कल्याण। ण बिना नां कोई प्राणी,णContinue reading “‘ ण’”

कृष्णा ने खेली खून की होली।

कृष्णा ने खेली खून की होली।कृष्णा ने खेली खून की होली… Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasal.कृष्णा ने खेली खून की होली कृष्णा ने भी खेली होली,सब अपनों से खेली होली।कभी फूलों से कभी रंग से,कभी ख़ून से खेली होली। राधा संग रंगों से खेली,भक्तों संग फूलों से खेली।अपनों संग मुस्कान से खेली,महाभारत में खून से खेली।Continue reading “कृष्णा ने खेली खून की होली।”

SECRET ALWAYS IS THAT REASON.

SECRET ALWAYS IS THAT REASON…Written by …वासल देवेन्द्र.. DK.VASALSECRET ALWAYS IS THAT REASON SECRET ALWAYS ISTHAT REASON.NOTHING HAPPENSWITHOUT A REASON. NOTHING HAPPENSWITHOUT A REASON.WE ONLY WITNESSCHANGE OF SEASON.CHANGE OF SEASONHAS A REASON. KNOWING IT TO BEIRRATIONAL REASON.BELIEVES VASAL DEVENDERWITHOUT AN OPTION.THERE WAS A GOOD REASONFOR HIS SON’SEARLY EXTINCTION. GOOD OR BADIS A COLOUR OF REASON.BADContinue reading “SECRET ALWAYS IS THAT REASON.”

ओ कृष्णा।

ओ कृष्णा…. WRITTEN BY वासल देवेन्द्र..D.K.VASAL  ओ कृष्णा। है सुना भी और पढ़ा भी मैंने,जिसकी रही भावना जैसी,प्रभु मूरत देखी तिन तैसी। अनंत है तूं अनंत तेरी सूरत,समस्या है ये कृष्णा मेरी।किस रुप में देखूं सूरत तेरी,किस भाव से देखूं मूरत तेरी। बैठे कदम्ब के पेड़ पर देखूंयां बजाते तुम्हें बांसुरी देखूं।तुम्हें यमुना के तीर परContinue reading “ओ कृष्णा।”

कभी-कभी।

कभी कभी… Written by. वासल देवेन्द्र..D.K.Vasalकभी कभी।कभी कभी सोचता हूं,है अजीब जिंदगी उसकी।ना हो हवा तो नां जले चिरागहो तेज़ हवा तो नां जले चिरागवो हवा,जो दोस्त है उसकी,है वो ही दुश्मन भी उसकी। वो ख़ुदा,जो जान है हमारी,वो ही लेता है जान हमारी।जब जी में आया जला दी,जब जी में आया बुझा दी।वो नाज़ुकContinue reading “कभी-कभी।”

कहां लिखती है कलम कभी।

कहां लिखती है कलम कभी .. Written Byवासल देवेन्द्र..D.K. VASALकहां लिखती है कलम कभी। कहां लिखती है कलम कभी,भावनायें उमड़ती हैं कवि की,बन कर काग़ज़ पर स्याही।महसूस कर ले वो जिस अहसास को,वो हो जाती रचना उसकी,कहां लिखती है कलम कभी। रचना हो मासूम अगर,समझो दिल से है निकली।ले आये अगर आंख में आंसू,समझो रुहContinue reading “कहां लिखती है कलम कभी।”

आग।

आग (एक भयानक एहसास यां विरोधाभास)written by वासल देवेन्द्र…D.K.VASALआग।आग ।  आग । आग …कहां…,कैसे…किधर , किस ओर।घबराई हुई  नज़र ,देखे  चारों ओर,हुआ लाल पीला बसंती गगन,हुईं हो जैसे भोर।गर्म हवा और काला नाग,दिखता था सब ओर।था आग का सन्नाटा ,बाकी सब शोर ही शोर। डरा – सहमा  था हर कोई,देख अग्नि का विकराल रूप।होता हैContinue reading “आग।”

ओ ख़ुदा एक बार बस एक बार।

ओ ख़ुदा एक बार बस एक बार…. Written by वासल देवेन्द्र…..D.K.Vasal. ओ ख़ुदा,एक बार बस एक बार,बन कर आम इंसान तूं आ।खो अपनी औलाद को,फिर मुस्कुरा के दिखा।हंसेगा वासल देवेन्द्र तुझ पर,मार ठहाके बार बार।वादा है तुझसे मेरा ये,ओ मेरे ख़ुदा।कभी तो यूं खुद को भी,तूं ज़रा आज़मा। मैं नहीं जानता,क्या तेरी जन्नत में,है सबसेContinue reading “ओ ख़ुदा एक बार बस एक बार।”

आंख मिचौली।

आंख मिचौली….. Written by वासल देवेन्द्र…D.K. Vasal.आंख मिचौली । खेलता रहता है मेरा खुदा भी,मुझसे आंख मिचौली।है उसका ये खेल भी निराला,मैं ढूंढता हूं तो वो,छिप जाता है।मैं छिप जाऊं तो वो ,नज़र नही आता। मैं कुछ भी नही ,पर उसकी नज़र में हूं ।वो सब जगह है ,फिर भी नज़र नही आता।यां तो वोContinue reading “आंख मिचौली।”

बहुत भोला है इन्सान।

बहुत भोला है इन्सान.. Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasal बहुत भोला है इन्सान,नही निकला,रोशनी की तलाश में।जब तक,अंघेरा नां मिला राह में। मासूम बहुत है इन्सान,कद्र बहुत  कुदरत की करता है।सूरज को चढ़ाता जल,धरती को करता नमन।रहता हवाओं के रुख में,पुकारता नदियों को मां हर पल। नदियां जो तोड़ें संयम,खुद को दोष देता है।आंधियों को भीContinue reading “बहुत भोला है इन्सान।”

ये ज़रूरी तो नहीं।

ये ज़रूरी तो नहीं…. Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasalये ज़रूरी तो नहीं। सम्भाल कर रखना,ज़िन्दग़ी के हर लम्हें को।हर अगले लम्हें में हो ज़िन्दग़ी,ये जरूरी तो नही। माना हर रात की,होती है सुबह।हर कोई देख पाये हर सुबह,ये ज़रूरी तो नहीं। हैं बहुत दर्द मेरे सीने में,खुद़ा देखे मेरे हर दर्द को।हर बार,ये ज़रूरी तो नहीं।Continue reading “ये ज़रूरी तो नहीं।”

झूठी थी बचपन की कहानी।

झूठी थी बचपन की कहानी… Written by…वासल देवेन्द्र D.k. Vasal. दादी ने सुनाई थी जो कहानी,झूठी थी वो बचपन की कहानी।एक था राजा एक थी रानी,दोनों मर गये खत्म कहानी।वासल देवेन्द्र ने देखी और जानी,वो बतलाता है वही कहानी। एक था राजा एक थी रानी,दोनों मिले शुरू हुई कहानी।एक हुआ बेटा एक हुई कन्या,राजा रानीContinue reading “झूठी थी बचपन की कहानी।”

बस ढूंढता रहता हूं मैं।

बस ढूंढता रहता हूं मैं।महीने हो चुके अब तो दो….. वासल देवेन्द्र… Written by D.K.Vasal महीने हो चुके अब तो दो,सोचते होगे तुम सब तो।सम्भल गया होगा वासल देवेन्द्र,हो गया होगा चुप रो रो कर वो। नहीं नहीं नहीं है ये सच,हर पल रहते आंसू पलकों पर।बहता रहता है एक झरना,हवा के झोंके से हिलContinue reading “बस ढूंढता रहता हूं मैं।”

ताश के पत्ते।

ताश के पत्ते…. Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasal.ताश के पत्ते। बाटंता है ख़ुदा मुकद्दर ऐसे,जैसे बंटते हैं ताश के पत्ते।उठा कर गड्डी मुकद्दर की,और काट के उसे प्यार से।बिना करे फिर फर्क कोई,बांटता जैसे ताश के पत्ते। कोई नही जान पाता कभी,क्या मिलेंगे उसको पत्ते।गुलाम, बादशाह, बेगम,ईका यां  फिर छोटे पत्ते। रंग बिरंगे मिलेंगे पत्ते,यां मिलेंगेContinue reading “ताश के पत्ते।”

कौन था वो?

कौन था वो… Written by वासल देवेन्द्र.. D. K. Vasalकौन था वो। पूछा मैंने एक ग्वाले से एक दिन,कैसे पहचानते हो गायें अपनी तुम।इन सैंकड़ों-हजारों गायों की भीड़ में,बोला वो ग्वाला तब मुझसे।जैसे इन लाखों की भीड़ में,पहचानते अपने बच्चे तुम। मैंने बोला,हर चेहरा होता हमारा अलग,ऐसे पहचानते अपने बच्चे हम।ग्वाला बोला,तुम देखो अगर नज़रोंContinue reading “कौन था वो?”

विश्वास नहीं होता है कृष्णा।

KINDLY KINDLY READ AND CIRCULATE AS MUCH AS POSSIBLE TO HELP ME.विश्वास नहीं होता है कृष्णा। विश्वास नहीं होता है कृष्णा… Written by वासल देवेन्द्र…D.K.Vasal.विश्वास नहीं होता है कृष्णा। सच कहता हूं कृष्णा तुझसे,झूठ नही कह सकता मैं।विश्वास नहीं होता है मुझको,व्यवहार किया जो तुने मुझसे। ज़ुबान नहीं थकती थी मेरी,कृष्णा कृष्णा कहते कहते।पागल साContinue reading “विश्वास नहीं होता है कृष्णा।”

डर लगता है डर लगता है।

डर लगता है डर लगता है… Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasalडर लगता है डर लगता है।छलनी कर गया सीना मेरा,दे गया मुझे वो घाव जितने।भीष्म को नां मारे होंगे,अर्जुन ने भी बाण इतने। हर घाव रोता है बारी बारी,है रिसता रहता ज़ख्मो से,हर दम ये ख़ून मेरा।सब देखो, सब देखो,कितना हूं बेशर्म बाप।देख लाश बेटे कीContinue reading “डर लगता है डर लगता है।”

ग़लत समय तुम आये कृष्णा।

ग़लत समय तुम आये कृष्णा.. Written by वासल देवेन्द्र.. D.K.Vasalगलत समय तुम आये कृष्णा,आना था तुम्हें कलियुग में।तुमने चुना एक अर्जुन,जो समझ नां पाया तुम्हारा ज्ञान।हो गया वो पूरा ही विचलित,एक अभिमन्यु के मरने से। यहां हर घर में रहता है अर्जुन,हर पल मरें अभिमन्यु यहां।सम्भाल लिया तुमने अर्जुन को,करने से  आत्मघात वहां।कौन सम्भाले यहांContinue reading “ग़लत समय तुम आये कृष्णा।”

छोड़ो मोह के धागे।

छोड़ो मोह के धागे… WRITTEN BY वासल देवेन्द्र..D.K.Vasalछोड़ो मोह के धागे। सब कहते हैं भूल जाओ अब,और बढ़ो तुम आगे।शायद वो नहीं जानते,क्या होते हैं मोह के धागे।होते दायरे छोटे मोह के,पर मजबूत होते हैं उसके धागे। बचपन से कहते बढ़ाओ मोह अपनों में,फर्क है जो गैरों में अपनो में,बस फर्क उतना ही प्यार औरContinue reading “छोड़ो मोह के धागे।”

बस बदनाम है नाम मेरा।

बस बदनाम है नाम मेरा… Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasal बस बदनाम है नाम मेरा। है चीज़ एक मैंने जाना,जो रहती हर दम हर जगह।नां अपना, पराया नां दोस्त उसका,हर ‘श’ पर है राज उसका। हर  शाम , सहर , दरबार उसका,हो वक्त जैसे ग़ुलाम उसका।कोई घर-बार नां कोई शहर उसका,नां धर्म, अधर्म है कर्म उसका।Continue reading “बस बदनाम है नाम मेरा।”

आईने से झूठ बोलने का हुनर।

आईने से झूठ बोलने का हुनर.. Written by वासल देवेन्द्र.. D.K.Vasalआईने से झूठ बोलने का हुनर। कहा किसी ने मुझसे,है जिंदगी आईने की तरहां।वो तभी मुस्कुराएगी,जब  मुस्कुराओगे तुम अपनी तरहां। ये बात नही है कोई नई,हैं जानते ये हम सभी।पर सच तुम भी,जान लो अभी।नहीं झूठ बोलता,आईना कभी। नहीं छिपा सकते हम,खुद से खुद को,करेंContinue reading “आईने से झूठ बोलने का हुनर।”

सांप–सीड़ी।

सांप –सीढ़ी.. Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasal                    (सांप — सीढ़ी)जाने अंजाने      ,ही सही,खेलती है          ,हर पीढ़ी।खेल सांप          ,सीढ़ी का,चढ़ते हैं उपर     ,तेज़ी से,   ले सहारा          ,सीढ़ी का।करते है नाज़     ,खुद पर,जैसे हो हुनर     ,इस पीढ़ी का। खेलते हैं खेल   ,पासे से,दे नतीजा        ,हाथ भाग्य के।उछलते हैं       ,आने पे छः,भूल पक्ष(sides) ,पासे के छः। हैं चढ़ता कोई         Continue reading “सांप–सीड़ी।”

काला टीका।

काला टीका… Written by वासल देवेन्द्र..D.K. VASAL.काला टीका। कहां माना मैंने कभी,काले टीके का चलन।कहां जाना मैंने कभी,ऩजर उतारने का ऱाज।नां जाने क्यों दिल करता है,सब कुछ मानने को आज। अक्सर सुना है लोगों से कहते,उतार दो इसकी नज़र।लगा दो इसे काला टीका,लग जाये नां इसे किसी की नज़र। किसकी लगती है नज़र और क्यों?कौनContinue reading “काला टीका।”

क्या अर्जुन समझ पाया गीता को?

नहीं! नहीं! अर्जुन नहीं समझ पाया गीता को।.Written by..वासल देवेन्द्र..D.K. Vasal. Kindly forward as much as possible. यदि मैं साबित नां कर पाया,कि अर्जुन नहीं समझ पाया गीता को।तो काट देना तुम गर्दन मेरी,सोच ये नीच कंहा से आया। यदि कर दिया साबित मैंने,कि अर्जुन नहीं समझ पाया गीता को।तो कृपा करके नां देना ज्ञानContinue reading “क्या अर्जुन समझ पाया गीता को?”

अधूरी कहानी

अधूरी कहानी . written by वासल देवेन्द्र..D.k.Vasalअधूरी कहानी कुदरत को जो करना है,कुदरत वो करके रहती है।एक मौज जो नाज़ुक कश्ती को,तुफ़ान से बचा कर ले आये।कुदरत ने तमाशा करना हो,साहिल (किनारा) पे डूबो के रहती है। हम हंस लें यां रों लें जितना भी,कुदरत तो बहरी होती है।लिखा खुद वासल देवेन्द्र ने,अपनी कविता ख़ामोशीContinue reading “अधूरी कहानी”

क्या वक्त भुला देता है ग़म।

क्या वक्त भुला देता है ग़म.. written by..वासल देवेन्द्रD.k.Vasal. क्या वक्त भुला देता है गम। कुछ दिन पहले बोया         ,बीज एक दर्द ने,अब फैल गई उसकी जड़ें    ,शरीर के हर अंग में।दर्द दिया हो गैर ने             , तो संभाल लेता है वक्त,दर्द हो अगर लाडले का      , तो और हवा देता है वक्त। वक्त भुलाContinue reading “क्या वक्त भुला देता है ग़म।”

ख़ुदा की करेंसी

WRITTEN BY …वासल देवेन्द्र..D.K.Vasal         ( ख़ुदा की करेंसी)आंसू जो आंख से टपका     , वो पानी नही है,है हकीकत हमारे दर्द की     , कोई कहानी नही है।आते नहीं आंसू                  , बेवज़ह कभी,कोई तो है वज़ह                ,जो आंख नम पड़ी। पूछा किसी ने हमसे           ,क्या गुज़री है घड़ी,रफ़्तार आंसुओं की           ,तब और थी बढ़ी।लगता था  ऐसे जैसे         Continue reading “ख़ुदा की करेंसी”

अक्षर ढाई…2.. दर्द.. Written by वासल देवेन्द्र..D. K.Vasal

अक्षर ढाई—2– दर्द।हर तरहां के लिखे “अक्षर ढाई” ,वासल देवेन्द्र ने कविता “अक्षर ढाई “में।बस “दर्द” ही लिखना भूल गया,हो नाराज़ वो मुझको डस गया। है पुत्र भी ढाई अक्षर का,और पितृ भी ढाई अक्षर का।कब पुत्र बन गया पितृ मेरा,मुझे ज़रा पता नही चला। है गंगा भी ढाई अक्षर की,और पिंड भी ढाई अक्षरContinue reading “अक्षर ढाई…2.. दर्द.. Written by वासल देवेन्द्र..D. K.Vasal”

कृष्ण भक्त और दर्द

कृष्ण भक्त और दर्द.. Written by..वासल देवेन्द्र..D. K. Vasalकृष्ण भक्त और दर्द। भक्ति करने वाले समझ लें,भक्ति सागर के किनारे नही।रहें डूबने को हर पल तैयार,इस राह में कोई सहारे नही। ये राह है कांटों से भरी,नही रहती यहां कोई घास हरी।उम्मीदें रह जाती हैं धरी,हर घड़ी होती है दर्द भरी। मिलता है इतना दर्दContinue reading “कृष्ण भक्त और दर्द”

खुदा का खंजर

खुदा का खंजर। ख़ुदा का खंजर…. WRITTEN BY ..वासल देवेन्द्रखुदा का खंजर,गलती से चल गया उसका खंजर,रो रहा है ख़ुदा आसमान में बहुत,देख कर भक्त के घर का मंजर। खड़ा है दरवाजे पर हो कर शर्मसार,सुन रहा है चीखें और भक्तों की पुकार।हिम्मत नही जुटा पाता आने की घर के अन्दर,वो जानता है सब कुछContinue reading “खुदा का खंजर”

श्मशान वैराग्य… Written by वासल देवेन्द्र…D.K.Vasal

कभी ना कभी होता सब का,थोड़ा बहुत मन वैराग्य।कभी कभी शमशान जो जाओ,होता है शमशान वैराग्य। मन सब का होता उश्चाट,थोड़ा बहुत शमशान में जा के।गुलमिल जाते वापस आकर,फिर अपने संसार में आके। हां गुलना मिलना भी है जरूरी,हैं जब तक बची हमारी सांसें।पर मत भूलो महसूस करना,लगा था जो शमशान में जा के। भागोContinue reading “श्मशान वैराग्य… Written by वासल देवेन्द्र…D.K.Vasal”

GREY FAITH

Written by वासल देवेन्द्र….D.K.VasalGREY FAITH PRAYER TO THE LORD,WITH SUBTLE AND DOUBTED WILL,WITH INCENSE STICK IN HAND,AS IF A PIOUS FRILL,BELIEVE YOU ME OR NOT,IS NOTHING BUT A DRILL. UNSHAKEN FAITH IN LORD,IS NOT A SIMPLE THOUGHT,IN FAITH NO ONE WAILS,AND STANDS LIKE A ROCK,THAT KIND OF FAITH,DARES TO MOVE’ MOUNTAINS. FAITH MOVES MOUNTAINS,NARRATED FROMContinue reading “GREY FAITH”

मारेंगे सुई चुभा चुभा के

WRITTEN BY D K VASAL.. वासल देवेन्द्र। मारेंगे सुई चुभा चुभा के ये दुनिया अजीब सराये ( INN ) फानी ( which has certain end) देखी, हर चीज़ यहां की आनी जानी देखी, जो जा कर नां आये वो जवानी देखी दे जो आ कर नां जाये वो बुढ़ापा देखा। पर ये अजीब दौर अबContinue reading “मारेंगे सुई चुभा चुभा के”

बोली की होली

बोली की होली। WRITTEN BY D.K.VASAL..वासल देवेन्द्र। बोली की होली आओ खेलें हम सब होली, इस बार खेलें, बोली की होली। होली है रंगों की टोली, हों जहां रंग होती वहां होली। चलो खेलें बोली की होली, थोड़ा हटकर खेलें इस बार की होली। हम ध्यान नहीं करते पर दिन भर, हम हर दम खेलतेContinue reading “बोली की होली”

हमारी प्यारी अनन्या।

WRITTEN BY D.K.VASAL…वासल देवेन्द्र। My granddaughter ANANYA’S birthday today. हमारी प्यारी अनन्या। अनन्या नहीं कोई आम कन्या, है अदभुत बहुत हमारी अनन्या। अनन्या का मतलब है अनंत, है सचमुच में अनन्त अनन्या ‌। पड़ने लिखने में श्रेष्ठ अनन्या, खेल कूद में तेज अनन्या। चित्रकारी में निपुण अनन्या, जो हम सब की है प्यारी अनन्या। मम्मीContinue reading “हमारी प्यारी अनन्या।”

कन्या की दुश्मन कन्या ।

Written by D.K.Vasal…..वासल देवेन्द्र। कन्या की दुश्मन कन्या, है वो घर धन्या ,जहां होती कन्या, द्रोपदी से जानों द्रुपद को। और जनक को जानकी से, विवेक बड़े अहंकार घटे, हो जिस घर में भी कन्या। कन्या ने जनमा मर्द को, और मर्द भी हो गया धन्य। मां मिल गई जैसे ईश्वर, है मां भी उसकीContinue reading “कन्या की दुश्मन कन्या ।”

WOMENS’ DAY, Men are mean I would say,

WOMEN S’ DAY ( DEDICATED TO ALL WOMEN) WOMENS’ DAY (DEDICATED TO ALL WOMEN) Written by D.k.Vasal.. वासल देवेन्द्र। Men are mean I would say, They celebrate a WOMENS’ DAY. Where is a day ? when woman is away, Every day is a WOMENS’ DAY. A man may live a long long life, He isContinue reading “WOMENS’ DAY, Men are mean I would say,”

अगर पलकें मेरी कम पड़ी

Written by D. K. Vasal …वासल देवेन्द्र। अगर पलकें मेरी कम पड़ी, अजीब होते हैं ,दिल के रिश्ते भी, कभी बच जाते हैं ,कांटों पर। कभी छिल जाते हैं ,मखमल पर जुड़ जाते हैं पल में ,और बिखर जाते भी। रहते हैं जिंदा ,मुलायम शब्दों पर, सजाना पड़ता है , नाज़ुक पलकों पर। मर जातेContinue reading “अगर पलकें मेरी कम पड़ी”

धीरे धीरे

Written by D.K.Vasal….वासल देवेन्द्र धीरे धीरे है सृष्टि का संदेश चलो तुम धीरे धीरे, चलती है धरती भी धीरे धीरे। ढलता है सूरज भी धीरे धीरे, टिमटिमाते हैं तारे भी धीरे धीरे। होती है भोर भी धीरे धीरे। धड़कता है दिल भी धीरे धीरे, चलती हैं सांसें भी धीरे धीरे। फिसलता है बचपन भी धीरेContinue reading “धीरे धीरे”

हिंसा

हिंसा Written by D. k. Vasal- वासल देवेन्द्र हिंसा हैं हिंसा करने के ,कई ढंग, हिंसा नही ,बस तोड़ना अंग। है हिंसा करना ,शान्ति भी भंग, इच्छा ना हो ,पूरी जब, हिंसा करता ,हर कोई तब। रोना चिल्लाना ,मचाना शोर, पाने को वस्तु ,यां प्यार, ये सब हिंसा के ,हथियार। शब्दों की है ,हिंसा गहरी,Continue reading “हिंसा”

मैं और मेरी “मैं”

Written by D.K. Vasal..वासल देवेन्द्र। मैं और मेरी “मैं” तुम तराशोगे ,अगर मुझमें, हैं तराशते ,हीरा जैसे। आयेंगी नज़र ,तुम्हें खूबी ही मुझमें, तुम तलाशोगे ,अगर मुझमें, हैं तलाशते ,ख़ामी जैसे, आयेगी नज़र ,तुम्हें कमी ही मुझमें। मैं क्या हूं ,कुछ भी नहींं, तुम तराशो मुझे ,यां तलाशो मुझे। हूं मैं कुछ ,भी नहीं, बसContinue reading “मैं और मेरी “मैं””

प्रारब्ध यां दो हाथ।

प्रारब्ध यां दो हाथ Written by D.K.Vasal-वासल देवेन्द्र प्रारब्ध यां दो हाथ वक्त ने दिया जो साथ हमेशां, ना आयेगा कोई तज़ुर्बा हाथ। ज़रुरत पड़ी अचानक जब, रह जाओगे मलते हाथ। हैं लकीरें किस्मत की सबके हाथ, है संवारना उनको अपने हाथ। है मेहनत करना अपने हाथ, नां रहो बैठे रख हाथ पर हाथ। छोड़ाContinue reading “प्रारब्ध यां दो हाथ।”

MIGRANT POOR SOULS

WRITTEN BY D K VASAL—वासल देवेन्द्र DEDICATED TO MIGRANT POOR SOULS. They walked, walked, walked and walked. The life seemed short, the road seemed long. I saw them fighting every inch. Beating distance, fighting thirst , putting hunger to clinch. The old one tired, the young one thirsty, the little one hungry. The sun wasContinue reading “MIGRANT POOR SOULS”

रिश्तों का सच

WRITTEN BY D K VASAL–वासल देवेन्द्र रिश्तों का सच मैं सच कहता हूं, हमेशां सच कहता हूं। नहीं बोलता झूठ कभी, हैं हर पल कहते हम सभी। थामा मैंने जो एक बार, नही छोड़ूंगा फिर वो हाथ। मैं जीता हूं अपनों के लिए, मरुंगा मैं अपनों के साथ। थरथरा गया अब तो झूठ, सच होContinue reading “रिश्तों का सच”

SOLDIERS –सैनिक

WRITTEN BY D K VASAL, DEDICATED TO SOLDIERS. SOLDIERS– सैनिक वो सो गये कफ़न ओढ़ के, हम सो गए मुंह मोड़ के, थे लाडले वो भी, अपने परिवार के, जो चले गये, सब छोड़ के। वो बन बन के शव , हमें झंझोड़ते रहे, हम शव हों जैसे, ऐसे सोते रहे। देख सुबह अखबारों में,Continue reading “SOLDIERS –सैनिक”

बांसुरी

बांसुरी WRITTEN BY D. K. VASAL ( बांसुरी ) इक टुकड़ा है बांस का, हैं बस छेद ही छेद। कहां समझ पाया कोई, हर छेद में कितने भेद। “स” लगाओ कहीं से, कहीं से लगाओ “प”। यकीनन राग बजेगा, करो ना कोई संदेह। इक टुकड़ा था बांस का, था ना कोई नाम। हरि ने उठायाContinue reading “बांसुरी”

मोक्ष

WRITTEN BY D. K. VASAL — वासल देवेन्द्र ( मोक्ष ) कहा किसी ने मुझसे, कहो कवि कुछ ऐसा। हो बात कल्याण की, हो संदर्भ मोक्ष का। अहो भाग्य मेरे, नाम आया याद , फिर हरि का। है मोक्ष नही ये प्रश्न सरल, लगता है समय बतलाने में। भगवान को भी लगा समय, अर्जुन कोContinue reading “मोक्ष”

मां का कन्धा

Written by D K Vasal – वासल देवेन्द्र ( मां का कंधा ) आज बहुत याद ,आ रही है, मुझे मेरी मां की। यूं तो हरा भरा ,भरपूर है मेरा घर, सिर्फ बच्चे ही नही ,हैं बच्चों के बच्चे भी मेरे घर। नां जाने फिर ,भी क्यों, लगता है मन ,खाली खाली सा। बहुत खोजाContinue reading “मां का कन्धा”

नव वर्ष

Written by D.K.Vasal- वासल देवेन्द्र (नव वर्ष ) आयो नया वर्ष मनायें, उठो जागो, हुआ नया सवेरा, उगा सूरज, अब मिटा अंधेरा। पक्षियों ने फिर, डेरा डाला, फिर किरणों, ने आंचल पसारा। मिल कर मंगल, गीत गाएं, अपने ईश्वर को, फिर से रिझ़ाये। चुनें फिर फ़ूल, फिर माला बनाएं, अपने प्रभु के, चरणों में चढ़ाएं।Continue reading “नव वर्ष”

मैं वही हूं वही हूं वही

Written by D.k. Vasal -वासल देवेन्द्र ( मैं वही हूं, वही हूं, वही ) मैं कौन हूं ? रिश्ता नाम ,कोई भी हो, मैं वही हूं, वही हूं, वही। किसी का पुत्र ,और पिता किसी का। किसी का मित्र ,और भाई किसी का, तुम पुकारो मुझे ,किसी रिश्ते यां नाम से, मैं वही हूं, वहीContinue reading “मैं वही हूं वही हूं वही”

चोर चोर चोर

Written by D.K. Vasal…वासल देवेन्द्र चोर चोर चोर चोर चोर चोर , सभी ओर था शोर, बच्चे बूढे ,और जवान। सभी मचायें ,शोर, किसको ,अच्छा लगता है। सोचो ,शब्द ये चोर। मैंने भी देखा ,सपने में, बार बार ,इक चोर। उठ जाऊं ,घबरा कर, नां देखूं ,अगर वो चोर। रोज़ रहता है ,सपनों में, नाContinue reading “चोर चोर चोर”

मर्ज़ी का ख़ुदा

WRITTEN BY D.K VASAL–वासल देवेन्द्र मर्ज़ी का ख़ुदा हम ढूंढते हैं ,खुदा ऐसा, जो करे वैसा ,हम चाहें जैसा। ना करे कबूल ,दुआ जो, वो ख़ुदा ,बदल देते। ना माने ,फिर भी जो, तो ख़ुदा ही ,भुला देते। चाहते हैं ,करे हर कोई , दुआ हमारी ,अपने खुदा को। पर मानते , नहीं फिर भी,Continue reading “मर्ज़ी का ख़ुदा”

नमक

Written by D. K. Vasal – वासल देवेन्द्र ( नमक ) मेरे होने की, ,कोई सराहना नही करता, मेरा ना होना ,कोई बर्दाश्त नही करता। मेरा ज़रा भी ,ज़्यादा होना, बहुत अखरता है। मेरा ना होना ,कोई सहन नही करता, शायद मैं ,भूल रहा हूं, सिर्फ रंग सफेद ,होने से कुछ नही ,होता है। मैंContinue reading “नमक”

पानी

Written by D. K. Vasal — वासल देवेन्द्र (पानी) हिंदी में जल, संस्कृत में पानी, है मेरा प्रणाम उसको। रखा जिसने पानी का, नाम पानी। पा से पावन ,नी से नीरद ,( जल देने वाला मेघ ) है बिना गंध पारदर्शी पानी। रखता नही कोई रंग पानी, क्या सच में है बेरंग पानी। मैं नहीContinue reading “पानी”

धुंध

Written by D K Vasal – देवेन्द्र वासल ( धुंध ) दिखती है धुंध ,हर तरफ, हैं धुंआ ही धुआं ,हर तरफ। हैं मौसम की शरारत, इन्सान की बेगैरत, यां सिर्फ नज़र का धोखा। देखा है मैंने इन्सान वो, था जो इन्सान की तरहां। अब रहता है छिपा पर्दों में, यां मद के आगोश में,Continue reading “धुंध”

अक्षर ढाई

Written by D.k.Vasal-वासल देवेन्द्र ( अक्षर ढाई ) Original Author. ज्ञान मार्ग जब ,खोजने निकला, मार्ग मिला ,अलबेला। जहां भी जाऊं ,जिधर भी देखूं, मिले ढाई अक्षर , का मेला। सोचा इक पल ,ध्यान लगा कर क्या होता है ,अक्षर ढाई जो आया समझ में, वासल देवेन्द्र के ( Original Author) बतलाता हूं ,मैं वोContinue reading “अक्षर ढाई”

अभी जिंदा हूं मैं

Vasaldk.blogspot.com हटाते हैं मेरा नाम जो        ,कविता से मेरी,हैं जान बहुत                   ,अभी कलम में मेरी।रहे उनको ये एहसास        ,अभी जिंदा हूं मैं। फिर करो कोशिश              ,मुझे भुलाने की,हो तुम को भी एहसास        ,अभी जिंदा हूं मैं।थका दिया मैंने वक़्त को      ,पर थका नही,हो वक़्त को भी एहसास      ,अभी जिंदा हूं मैं। गैरों से ज़्यादा अपनोंContinue reading “अभी जिंदा हूं मैं”