धुंध

Written by D K Vasal – देवेन्द्र वासल ( धुंध ) दिखती है धुंध ,हर तरफ, हैं धुंआ ही धुआं ,हर तरफ। हैं मौसम की शरारत, इन्सान की बेगैरत, यां सिर्फ नज़र का धोखा। देखा है मैंने इन्सान वो, था जो इन्सान की तरहां। अब रहता है छिपा पर्दों में, यां मद के आगोश में,Continue reading “धुंध”

अक्षर ढाई

Written by D.k.Vasal-वासल देवेन्द्र ( अक्षर ढाई ) Original Author. ज्ञान मार्ग जब ,खोजने निकला, मार्ग मिला ,अलबेला। जहां भी जाऊं ,जिधर भी देखूं, मिले ढाई अक्षर , का मेला। सोचा इक पल ,ध्यान लगा कर क्या होता है ,अक्षर ढाई जो आया समझ में, वासल देवेन्द्र के ( Original Author) बतलाता हूं ,मैं वोContinue reading “अक्षर ढाई”

अभी जिंदा हूं मैं

Vasaldk.blogspot.com हटाते हैं मेरा नाम जो        ,कविता से मेरी,हैं जान बहुत                   ,अभी कलम में मेरी।रहे उनको ये एहसास        ,अभी जिंदा हूं मैं। फिर करो कोशिश              ,मुझे भुलाने की,हो तुम को भी एहसास        ,अभी जिंदा हूं मैं।थका दिया मैंने वक़्त को      ,पर थका नही,हो वक़्त को भी एहसास      ,अभी जिंदा हूं मैं। गैरों से ज़्यादा अपनोंContinue reading “अभी जिंदा हूं मैं”