बदल गया रिश्ता कृष्णा से।

KINDLY READ. .. YOU WILL LIKE. LORD WANTS ME TO HAVE A NEW PERSPECTIVE TO LIFE. बदल गया रिश्ता कृष्णा से।बदल गया रिश्ता कृष्णा से…. Written by वासल देवेन्द्र.. D.K.Vasalबदल गया रिश्ता कृष्णा से। तूं भी तो कुछ,चुनता होगा।जैसे तूने,चुना विदुर को।अभिमन्यु को,शिष्य चुना।तूने ही तो,चुना अर्जुन को। सुदामा को,तूने मित्र चुना।ग्वालों को,सखा तूने हीContinue reading “बदल गया रिश्ता कृष्णा से।”

वक्त के हाथ नहीं होते।

वक्त के हाथ नहीं होते।.. Written by वासल देवेन्द्र….D.K. Vasal. वक्त के हाथ नहीं होते,पर तमाचा भारी होता है।वो फर्क नही करता किसी में,कोई सोया है यां जागा है। कब किसी को मार दे तमाचा,कोई जान नही पाता है।वक्त के हाथ नही होते,पर तमाचा भारी होता है। मैंने भी खाया वो तमाचा,होश उड़ा  के रखContinue reading “वक्त के हाथ नहीं होते।”

सपने में पहुंचा गोलोक।

सपने में पहुंचा गोलोक (कृष्ण लोक).. Written by..वासल देवेन्द्र..D.K.Vasal सपने में पहुंचा गोलोक,प्यासे की जैसे,बुझ गई प्यास,ऐसे गीला हो गया कंठ।हरि ने दिखा,घर अपना सपने में,कर दी मुझ पर,कृपा अनन्त। वैभव वैभव चारों ओर,वैभव बस वैभव,बस कुछ नां ओर। चमक ऐसी आंखें चुंधियाई,नां चांद नां सूरज नां कोई बिजली।कर नां सकें हजार सूरज भी,ऐसी वहांContinue reading “सपने में पहुंचा गोलोक।”

मिट्टी

मिट्टी ..Written by वासल देवेन्द्र …D.K.VASALमिट्टी। ख़ुदा ने बना कर,हमको मिट्टी का।कह दिया ,फिर कान‌ में। उड़ ले तूं मिट्टी,कहां तक  जायेगी।छूटा जो साथ हवा का,फिर जमीं पर गिर जायेगी। इन हवायों में ही है,ज़िन्दगी सब की।हों सांसें हमारी यां तुम्हारी,समझ लेगी अगर,तो ज़िंदा बच जायेगी,वर्रणा बंजर कहलायेगी। तेरा अपना,कोई वाजूद नहीं है।पहाड़ से निकलीContinue reading “मिट्टी”

नां जाने क्यों।

Kindly, Kindly READ.नां जाने क्यों।Written by वासल देवेन्द्र ..D.K.VASALनां जाने क्यों।नां जाने क्यों,सब कुछ,अजीब सा दिखता है।वक्त ख़ुद बेवक्त सा,और जहां,एक वहम सा दिखता है। नां जाने क्यों,दर्द ख़ुद दर्द में,और सूरज,ख़ुद को जलाता दिखता है। नां जाने क्यों,लब मुस्कुराने से।और मुस्कुराहट,लबों से डरती है। नां जाने क्यों ,जिंदगी जीने से,और मौत,मरने से डरती है।Continue reading “नां जाने क्यों।”

हर काली अमावस के बाद।

हर काली अमावस के बाद।… Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasalहर काली अमावस के बाद। बहुत कुछ,सीखा ज़िन्दगी से।पर कुदरत से,सीखना रह गया।नहीं होती,सीखने की उम्र कोई।चलो करता हूं,कोशिश मैं भी वही। सागर से,संन्यासी बनना।कुछ नां रखना,अपने पास।बादल को,दे देना पानी।इन्सानों कोघातू संसार। घरती से,सीखूं सहना मैं।जैसे भी हों,मेरे हालात।लाखों होते,दफन मां धरती में।अपने सब,धरती के लाल।Continue reading “हर काली अमावस के बाद।”

आईने में दरार। Written by वासल देवेन्द्र ।D.K.Vasal

आईने में दरार।..WRITTEN BY वासल देवेन्द्र। D.K.VASAL आईने में दरार। देखी है,दरार आईने में मैंने।पता नहीं,जख्मी वो था यां मैं ?हालात कैसे,बदल देते हैं इन्सान को।वो  नहीं समझ पाता फिर,खुद को,यां हालात को। शीशा भी कहां,सही अक्स दिखाता है।वो अपनी चोट को भी,हमारी दिखाता  है। नां करुं सच की उम्मीद,अगर शीशे से।तो फिर किससे करुं,कायनातContinue reading “आईने में दरार। Written by वासल देवेन्द्र ।D.K.Vasal”

ओ कृष्णा ये चरण तुम्हारे । Written by वासल देवेन्द्र । D.K.VASAL

ओ कृष्णा ये चरण तुम्हारे,बांध के रखते नैन हमारे।हो गये हम तो ऋणी तुम्हारे,कृष्णा कृष्णा हर सांस पुकारे। सच कहना है शास्त्रों का,है चरणों में ब्रह्माण्ड तेरे।तूं कर कृपा ओ कृष्ण मेरे,रहूं हर पल मैं चरणों में तेरे। बड़े बड़ों नें नहीं समझा,क्या राज़ है तेरे चरणों में।नहीं समझ पाये राजा बलि,कैसे चरण पहुंचे तीनोंContinue reading “ओ कृष्णा ये चरण तुम्हारे । Written by वासल देवेन्द्र । D.K.VASAL”

नीयत नज़र और विचार।

नीयत, नज़र और विचार। Written by वासल देवेन्द्र । D.K.Vasalनीयत नज़र और विचार। सिर्फ नीयत,नज़र और विचार,गंदा होता है।वर्ना जिस्म तो,बहन का भी,वैसा ही होता है। किसी भी उम्र में,सो जाओ साथ मां के,मां, मां ही रहेगी,बेटा – बेटा ही रहेगा।पर हर पराई औरत पे,विचार गंदा ही होता है। नज़र साफ़ हो,तो हर चीज़,साफ दिखतीContinue reading “नीयत नज़र और विचार।”

जग…WRITTEN BY वासल देवेन्द्र ।… D.K.VASAL

“जग “ज से जन्म,ग से गति. Written by वासल देवेन्द्र..D.K. Vasal.” जग “ज से जन्म , ग से गति। खूब जपा हरि को मैंने,जीवा से जपा और मुख से जपा।कंठ से नीचे, शायद उतरा नहीं मैं,मन से  शायद नहीं जपा। मां कहती थी हर पल मुझको,मन से जपना होगा हर पल,पाना है जो तुझे हरिContinue reading “जग…WRITTEN BY वासल देवेन्द्र ।… D.K.VASAL”

ये किसने फिर पुकारा मुझे।

TODAY 19/5/22.LAST YEAR ON 19/5/21 MY DARLING SON GIRISH LEFT US FOR EVER.EVERY MOMENT OF MY LIFE I STRUGGLE – IN VAIN , TO CONTROL MY EMOTIONS THAT LEAD TO TEARS. RIGHT NOW WHEN IAM PENNING THIS DOWN THE TEARS ARE ROLLING DOWN MY CHEEKS..MY GRAND CHILDREN LOOK UPON ME ( THE SETTING. SUN) WITHContinue reading “ये किसने फिर पुकारा मुझे।”

दीवाना ही सियाना निकला। Written by वासल देवेन्द्र …D.K. VASAL

दीवाना ही सियाना निकला।दीवाना ही सियाना निकला…. Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasal.दीवाना ही सियाना निकला। अच्छे थे वो लोग,जो मयखाने (शराबखाने) के दोस्त निकले।छोड़ जिंदगी के लम्बे सफर  को,मयखाने से होकर निकले। जब तक रहे मस्त रहे,नां खुशी में रहे,नां ग़म में रहे।बस मयखाना उनमें,और वो मयखाने में रहे। समझदार थे वो,जिंदगी का राज़ समझ गये।यहांContinue reading “दीवाना ही सियाना निकला। Written by वासल देवेन्द्र …D.K. VASAL”

नां मुड़ कर देख मुझे ऐ जिंदगी। Written by वासल देवेन्द्र …D.K.VASAL

नां मुड़ कर देख मुझे , ए ज़िन्दगी।Written by वासल देवेन्द्र।  D.K.Vasal नां मुड़ कर देख मुझे,ए ज़िन्दगी,फिर मोहब्बत हो जायेगी।इश्क का ये असूल है,मुड़ कर जो देखा,तो मोहब्बत कहलायेगी।। गुज़र रही है मेरी,कुछ यादों के सहारे,नां दे दखल तूं अब,नां दे झूठी दिलासा।उम्र नही है मेरी,जो चलाता रहूं ये सिलसिला।। यादें भी जो बचीContinue reading “नां मुड़ कर देख मुझे ऐ जिंदगी। Written by वासल देवेन्द्र …D.K.VASAL”

दस्तक।

दस्तक।दस्तक।  Written by वासल देवेन्द्र….D.K.VASALदस्तक।इतने मसरुफ़ ‌(busy )नां रहो,कि ख़ुद ख़ुद से नां मिल सको।इतने मगरूर  ( घमंडी )भी नां रहो,कि दिल की दस्तक, ( knock)नां सुन सको। झांका करो ख़ुद में भी,कभी कभी।ज़ंग लग जाते हैं,बंद किवाड़ों को भी। इक सांसों का सिलसिला,ही नहीं है बस  ज़िन्दगी।कुछ जीयो ख़ुद के लिए,कुछ करो ख़ुदा किContinue reading “दस्तक।”

दिल चाहता है। Written by वासल देवेन्द्र ….D.K.VASAL

दिल चाहता है।Written by वासल देवेन्द्र…..D.K.VASALदिल चाहता है। दिल चाहता कुछ और है,पर होता कुछ और है।मुझे शक है, मुझे शक है,कि मेरी चाहत,और होने के दरमिंयान।खड़ा वो ख़ुदा है। दिल तो नादान है,कहां समझता‌ है।ख़ुदा को,अपना समझकर।उसकी हर “श” पर,हक समझता है। नहीं जानता वो नादान,बंटवारा,पैसों का हो,यां दिल का।अक्सर,अपनों में होता है। चाहतContinue reading “दिल चाहता है। Written by वासल देवेन्द्र ….D.K.VASAL”

फकीर –कौन?…Written by वासल देवेन्द्र।…D.K.VASAL

फ़कीर- कौन ? WRITTEN BY वासल देवेन्द्र।…D.K.VASALफ़कीर — कौन? ग़म सब को खा गया,ग़म का नां कोई पीर।जो ग़म को खा गया,उसका नाम फ़कीर। रांझा हर पल कहता रहा,वो तो मेरी हीर।पा लेता वो रब को,जो रब को कहता हीर। होगा कुछ तरीका तो,पाने का ख़ुदा को।किताबों के पन्नों में तो,यूं ख़ुदा मिलता नही। होगाContinue reading “फकीर –कौन?…Written by वासल देवेन्द्र।…D.K.VASAL”

ज़ख्म कहां भरते हैं कभी। Written by वासल देवेन्द्र।..D.K.VASAL

ज़ख्म कहां भरते हैं कभी।….WRITTEN BY वासल देवेन्द्र।…D.K.VASAL ज़ख्म कहां भरते हैं कभी,जो भर जाये वो ज़ख़्म नहीं।दर्द कहां जाते हैं कभी,जो चला जाये वो दर्द नहीं यादें कहां मिटती हैं कभी,जो मिट जाये वो याद नहीं।लहू के रंग कहां घुलते हैं,घुल जाये जो रंग,वो लहू का नहीं। कहता है वासल देवेन्द्र हर दुआ,कहां सुनताContinue reading “ज़ख्म कहां भरते हैं कभी। Written by वासल देवेन्द्र।..D.K.VASAL”

अनकहा।….WRITTEN BY वासल देवेन्द्र…..D.K. VASAL

अनकहा।……Written by वासल देवेन्द्र। D.K.Vasalअनकहा। ओ जिंदगी,अभी बहुत कुछ,अनकहा है पास मेरे।किससे कहूं, कैसे कहूं,अब अंधेरों में,साया भी,कहां बचा है पास मेरे। वो चिराग था मेरी आंख का,वो नूर था मेरी रुह का।कलेजे का टुकड़ा था मेरा,एक अजीब सी आंधी ने,लूट लिया जहां मेरा। कभी जिंदगी से मत कहना,नया कुछ सिखाने को।कीमत बहुत मांगती है,वोContinue reading “अनकहा।….WRITTEN BY वासल देवेन्द्र…..D.K. VASAL”

मौत से पहले ज़िंदगी मर गई। Written by वासल देवेन्द्र। D.K.VASAL

है अजीब सा ज़हर,आसमानों में।अब हवा भी डरती है,सांस लेने में।जैसे लहरें हों,प्यासी दरिया में।भटकती हो रुहकुछ पाने में। ऐसा लगता  है जैसे,          सब कुछ बदल गया।सहने की आदत क्या पड़ी,दर्द ही दवा बन गया। ज़रुरत नहीं है,दुश्मनों की अब।दोस्त ही अब तो,दुश्मन बन गया ।कहां जाऊं,ढूंढने मैं सच को।हर झूठ,अब सच बन गया। रंग बदलतेContinue reading “मौत से पहले ज़िंदगी मर गई। Written by वासल देवेन्द्र। D.K.VASAL”

बोली की होली

बोली की होली। WRITTEN BY D.K.VASAL..वासल देवेन्द्र। बोली की होली आओ खेलें हम सब होली, इस बार खेलें, बोली की होली। होली है रंगों की टोली, हों जहां रंग होती वहां होली। चलो खेलें बोली की होली, थोड़ा हटकर खेलें इस बार की होली। हम ध्यान नहीं करते पर दिन भर, हम हर दम खेलतेContinue reading “बोली की होली”

अमावस की रात में चांद। …WRITTEN BY वासल देवेन्द्र।…D.K.VASAL

अमावस की रात में चांद चाहते हो। Written by वासल देवेन्द्र।…D.K. Vasal. ख़ुदा भी चाहते हो,जहां भी चाहते हो।बड़े नां समझ हो,अमावस की रात में,चांद चाहते हो। ख़ुदा जो मिल गया,तो ख़ुद ख़ुद नां रहोगे।जो ख़ुद को खो दिया,तो क्या जहां में तुम लोगे। इश्क जहां से करोगे,तो ख़ुदा नां मिलेगा।इश्क ख़ुदा से करोगे,तो जहांContinue reading “अमावस की रात में चांद। …WRITTEN BY वासल देवेन्द्र।…D.K.VASAL”

पुकार। written by वासल देवेन्द्र। D K. VASAL

पुकार ।पुकार।… WRITTEN BY वासल देवेन्द्र…D.K.VASALपुकार। ओ ख़ुदा,जो किस्मत में लिखा है,वो ही दिया तो क्या दिया।तू ख़ुदा तो तब है,जब वो दे,जो किस्मत में नहीं लिखा। किस्मत में,तो मेरे कर्मो की कमाई है।जो वो ही दिया,तो कहां तेरी खुद़ाई है। पाप भी मेरे,पुण्य भी मेरे,अच्छे बुरे कर्म भी मेरे।पर गिनती तेरी,और हिसाब भी तेरा,क्याContinue reading “पुकार। written by वासल देवेन्द्र। D K. VASAL”

यहां ख़ुदा भी आने से घबराते हैं।

यहां ख़ुदा भी घबराते हैं।…. WRITTEN BY वासल देवेन्द्र। …D.K.VASAL. यहां ख़ुदा भी घबराते हैं।ए नादान ज़रा सम्भल कर चल,ये इन्सानों की बस्ती है।रंग रूप बदल देते हैं ये,यहां ख़ुदा भी आने से डरते हैं। हैरान है वासल देवेन्द्र बहुत,ये दिखाते ख़ुदा को साथ हथियार।ये ख़ुदा को भी समझते कमज़ोर,ये कहां उस से घबराते हैं।Continue reading “यहां ख़ुदा भी आने से घबराते हैं।”

ज़ुबान।

ज़ुबान। Written by वासल देवेन्द्र।….D.K.VASALज़ुबान।बस रिश्तों का लिहाज़ रखते हैं,वर्ना मुंह में ज़ुबान हम भी रखते हैं।तुम्हारी नादानगी शायद हम से ज़्यादा  हैं,इसलिए ज़ुबान बन्द रखते हैं। होती तो है हर किसी के पास,पर अक्लमंद संभाल कर रखते हैं।होती है आदत से चंचल बहुत,सयाने लोग अंकुश लगा के रखते हैं। ज़ुबान के बदले चल जातीContinue reading “ज़ुबान।”

अकेला……

Today 9 months when our darling son Girish left alone and left us alone in tears.Kindly read how I feel.अकेला।… Written by वासल देवेंद्र..अकेला।आज इतना अकेला,लग रहा है मुझको।जैसे छोड़ गया कोई,दफ़न करके मुझको। याद इतनी,आती है उसकी।कि पलकें भी मना करती हैं,झपकने से अब तो। लेता रहता हूं करवटें,अब नींद नहीं आती।अब तो तकियाContinue reading “अकेला……”

SOLDIERS- सैनिक

SOLDIERS – सैनिकWRITTEN BY वासल देवेन्द्र।… D K VASAL,DEDICATED TO SOLDIERS.SOLDIERS– सैनिक वो सो गये कफ़न ओढ़ के,हम सो गए मुंह मोड़ के,थे लाडले वो भी, अपने परिवार के,जो चले गये, सब छोड़ के। वो बन बन के शव , हमें झंझोड़ते रहे,हम शव हों जैसे, ऐसे सोते रहे।देख सुबह अखबारों में,  शहादत उनकी,ले लेContinue reading “SOLDIERS- सैनिक”

किरदार। अब मैंने कहना छोड़ा।… written by वासल देवेन्द्र।..D.K. VASAL

किरदार.. अब मैंने कहना छोड़ा।… Written by वासल देवेन्द्र।… D.K.Vasalकिरदार…संगत का असर होता है,अब मैंने कहना छोड़ा।फूलों के संग रह कर भी,कब कांटों ने चुभना छोड़ा। बात संगत की नहीं,किरदार की हैं।कहां फूलों ने,संग कांटों के,महकना छोड़ा। सांप लिपटता रहता है,चंदन के पेड़ पर।कहां छोड़ता है,ज़हर उगलना।चंदन भी,बनाए रखता है,किरदार अपना।नहीं छोड़ता,खुशबू देना। हर जीव,Continue reading “किरदार। अब मैंने कहना छोड़ा।… written by वासल देवेन्द्र।..D.K. VASAL”

ओ कृष्णा ये नैन तुम्हारे।.. WRITTEN BY वासल देवेन्द्र।…D.K. VASAL

ओ कृष्णा ये नैन तुम्हारे… Written by..वासल देवेन्द्र.. D.K.Vasalओ कृष्णा ये नैन तुम्हारे। ओ कृष्णा ये नैन तुम्हारे,करते हैं बेचैन ये मुझको।छीन लिया मेरा चैन इन्होंने,क्या बताऊं ओ मेरे कृष्णा,क्या हाल हुआ है मेरा तुझको। सच में थी क्या राधा बांवरी?देखे जो हर पल नैन तुम्हारे,फस गई वो नैनों के जाल में,दुनिया कहे राधा थीContinue reading “ओ कृष्णा ये नैन तुम्हारे।.. WRITTEN BY वासल देवेन्द्र।…D.K. VASAL”

मोमबत्ती।… Written by वासल देवेन्द्र। D.K. Vasal

मोमबत्ती… Written by वासल देवेन्द्र। D.K.Vasalमोमबत्ती।मोमबत्ती जिस घागे को,दिल में बसाये रखती है।ख़ाक कर देता है,वो घागा ही मोमबत्ती को। दिल में जो भी बसता है,दर्द देता है।बड़ा मुश्किल है समझना,कसूर किसका है।बसने वाले का,यां दिल का है। खाली रखे जो दिल ख़ुद को,तो उदास रहता है।बसा ले जो किसी को,तो दर्द सहता है।बड़ा नाज़ुकContinue reading “मोमबत्ती।… Written by वासल देवेन्द्र। D.K. Vasal”

ख़ुदा रहता है आसमांनो में। वो…. दूर….. बहुत दूर…..

ख़ुदा रहता है आसमांनो में। वो….. दूर…..। बहुत दूर……. WRITTEN BY वासल देवेन्द्र। D.K. Vasal वो……………दूर…………।बहुत दूर…………..।ख़ुदा रहता है आसमांनो में,यही तो तमाम उम्र,भरते रहे मेरे कानों में। दूरबीन बनाईं इन्सान ने,लाने को सितारों को पास।फिर क्यों भेज दिया,दिल में बसे ख़ुदा को,दूर……. आसमानों में। हर कीमती चीज़ को,दिखाते हैं पहुंच के बाहर।यकीन कर लेताContinue reading “ख़ुदा रहता है आसमांनो में। वो…. दूर….. बहुत दूर…..”

चलती नदी में ठहरा पानी।.. Written by वासल देवेन्द्र।…D.K. VASAL

चलती नदी में ठहरा पानी। Written by वासल देवेन्द्र…D.K.VASAL चलती नदी में ठहरा पानी। वक्त गुज़रता ही नहीं,और ठहरता भी नहीं।नां जाने ज़िन्दगी,किस दौर में ले आई मुझे।पहले चलता था मैं,वक्त से आगे।अब वक्त मेरे साथ,चलता ही नहीं। अजीब सा हो गया है सब कुछ,कुछ भी जाना पहचाना सा,लगता ही नहीं।सांस तो ले रहा हूंContinue reading “चलती नदी में ठहरा पानी।.. Written by वासल देवेन्द्र।…D.K. VASAL”

कौन लगाम कौन घोड़ी। written by वासल देवेन्द्र D.K.VASAL.

कौन लगाम और कौन घोड़ी।WRITTEN BY वासल देवेन्द्र…D.K.VASALकौन लगाम और कौन घोड़ी। कई रिश्ते बना कर भेजे ख़ुदा ने,पर इन्सान भी चतुर निकला।एक दोस्ती का रिश्ता बनाया उसने,जो हर रिश्ते से हसीन निकला। ज़्यादा मैं नहीं कहूंगा कुछ,है सोचना वासल देवेन्द्र का।अनमोल चीज़ें होती हैं थोड़ी,अजीब रिश्ता है ये यारों।नही जानता कोई इसमें,कौन लगाम औरContinue reading “कौन लगाम कौन घोड़ी। written by वासल देवेन्द्र D.K.VASAL.”

हां, कुदरत सब की होती है। Written by वासल देवेन्द्र।…D.K. VASAL

हां, कुदरत सब की होती है। Written by वासल देवेन्द्र।…D.K.Vasal हांकुदरत सब की होती है,ध्यान से देखा,मैंने बरसात को,बराबर बरसती है।पर कहां सब के सर पर,छत होती है। आंधी की जननी भी,हवा होती है।बराबर चलती है,उड़ जाये चाहे गरीब की छत,कहां फर्क करती है। हांकुदरत सब की होती है,सूरज भी कहां फर्क करता है।बिना छतContinue reading “हां, कुदरत सब की होती है। Written by वासल देवेन्द्र।…D.K. VASAL”

शीशे की रसभरी।.. Written by वासल देवेन्द्र।…D.K.Vasal

शीशे की रसभरी। Written by वासल देवेन्द्र।..D.K.VASAL. हर अपना,खुबसूरत कहता था मुझे।इसी यकीन पर,कभी शीशा नही देखा, अपने कहां,द़ाग देखते हैं अपनों का।इसी वहम में  मैंने कभी,उनका द़ाग नही देखा। हर कोई अपना है मेरा,बस ईसी उम्मीद पर जिया।इसी भरोसे पर कभी,किसी का इम्तिहान नां लिया। कुछ गलतफहमियां,अच्छी हैं जीने के लिएपर मैं तो पूराContinue reading “शीशे की रसभरी।.. Written by वासल देवेन्द्र।…D.K.Vasal”

दौड़ो दौड़ो मन्दिर दौड़ो। Written by वासल देवेन्द्र।…D.K.Vasal

दौड़ो दौड़ो मन्दिर दौड़ो। Written by  वासल देवेन्द्र। D.K. Vasalदौड़ो दौड़ो मन्दिर दौड़ो। दौड़ो दौड़ो मन्दिर दौड़ो,दौड़ो गिरिजाघर , गुरुद्वारे भी।भीतर अपने नहीं मिला तो,ख़ुदा मिलेगा कहीं नहीं। मन्दिर का मतलब,मन के अन्दर।नहीं मिला जो अपने अन्दर,तो मन्दिर मिलेगा कहीं नहीं। भागते फिरते खोजते उसको,जो हर पल रहता अपने अंदर।जैसे ढूंढता हिरण खुशबू कोरख कस्तूरीContinue reading “दौड़ो दौड़ो मन्दिर दौड़ो। Written by वासल देवेन्द्र।…D.K.Vasal”

चांद फिर निकला। Written by वासल देवेन्द्र।..D.K. VASAL

चांद फिर निकला।…. Written by वासल देवेन्द्र..D.k. Vasalचांद फिर निकला। चांद फिर निकला ,सुना है रात हो गई।किसने किसको कहा,नही मालूम।क्यों करूं मालूम,मेरी तो दिन में हीरात हो गई। सुना है,जब साफ हो आसमानतो रौशन करते हैं,सितारे भी आसमान। मेरा तो ग्रहण में है आफ़ताब (सूर्य)क्या करेंगे रौशन,ये टिमटिमाते सितारे,ये हल्के फुल्के जुगनू,कितना भी आसमानContinue reading “चांद फिर निकला। Written by वासल देवेन्द्र।..D.K. VASAL”

उम्मीदl… Written by वासल देवेन्द्र।…D.K.VASAL

उम्मीद… Written by वासल देवेन्द्र।D.K.VASALउम्मीद।हर रिश्ते में,एक उम्मीद बसी रहती है।जब तक नां आज़मायो,ज़िंदा रहती है। वो डोर,जिसे उम्मीद कहते हैं।बहत नाज़ुक होती है,इस्तेमाल से पहले ही,टूट जाती है। यूं ही नहीं कुदरत ने,पतझड़ को बनाया।वर्ना कैसे पता चलता,कौन अपना कौन पराया। पतझड़ में ही,रिश्तों की परख होती है।वर्ना बरसात में तो,हर पत्ती ही हरीContinue reading “उम्मीदl… Written by वासल देवेन्द्र।…D.K.VASAL”

जज़्बात.. Written by वासल देवेन्द्र। D.K.Vasal

जज़्बात Written by वासल देवेन्द्र। D.K.VASALजज़्बात। इमारतें ऊंची होती गई,जज़्बात ज़मीन में दफ़न होते गए।किसी भी मंज़िल से देखो तुम,फासले कुछ नां कुछ बढ़ते गये। कसूर नां ईमारत का है,नां ईंट और पत्थर का।हम ईंट पत्थर में इतना उलझ गए,कि हमारे दिल ही पत्थर में बदल गये। हर लगती हुई ईंट ने,दीवार बना दी।उस मासूमContinue reading “जज़्बात.. Written by वासल देवेन्द्र। D.K.Vasal”

कुछ तो जरूर हुआ होगा।

कुछ तो जरूर हुआ होगा। Written by वासल देवेन्द्र। D.K.Vasal.कुछ तो जरूर हुआ होगा। दर्द जब बढ़ा मेरा,रुक गया मैं।मुड़ा ज़रा,देखने को अपने,गुनाह ज़रा। यूं ही नहीं दर्द बढ़ा होगा,कुछ तो ज़रूर हुआ होगा।कोई बड़ा गुनाह हुआ होगा,यां ख़ुदा को धोखा हुआ होगा। कुछ तो जरूर हुआ होगा,कहां मैंने कुछ सोचा होगा।कहां दर्द को यादContinue reading “कुछ तो जरूर हुआ होगा।”

TODAY 6 MONTHS WHEN MY BELOVED SON GIRISH LEFT ALONE AND LEFT US ALONE.

तन्हाई.. जहां सबके घर शीशे के हैं।Written by वासल देवेन्द्र।..D.K.VASALतन्हाई… जहां सबके घर शीशे के हैं। सोचता है वासल देवेन्द्र,क्यों नां मैं?ऐसी बस्ती में बस जाऊं,जहां बस अजनबी ही बस्ते हों।नां कोई गिला नां शिकवे हों।नां उम्मीद कोई नां टूटने का डर,जहां सबके घर शीशे के हों।जहां अपना नां हो कोई मेरा,नां समझे कोई दर्दContinue reading “TODAY 6 MONTHS WHEN MY BELOVED SON GIRISH LEFT ALONE AND LEFT US ALONE.”

सीने से लगने वाले।

सीने से लगने वाले… Written by वासल देवेन्द्र…D.K.VASAL हर चीज़ बेचते हैं बाज़ार में,आज कल के बेचने वाले।हो नई यां पुरानी।ढूंढा मैंने भी बहुत,पर नही मिलते अब,वो सीने से लगने वाले।। दर्द बांटते थे सब,हों अपने यां पराये।अब एक भीड़ है बस,हैं सब उसका हिस्सा।उस भीड़ में खो गये,सब अपने सब पराये। किसी से अपनाContinue reading “सीने से लगने वाले।”

OH, LORD BE MY ANCHOR.

OH LORD, BE MY ANCHOR. WRITTEN BY वासल देवेन्द्र।..D.K.VASAL.OH, LORD, BE MY ANCHOR. OH, LORD!I WISH TO ANCHOR INTO,YOUR DIVINE POWER.UPON ME  BESTOW,YOUR BENIGN SHOWER. I HAVE REALISED,NEVER BEFORE EVER.THIS WORLD IS FULL OF,STORIES OF HORROR.DAY AFTER DAY,MY HEART SINKS LOWER. HURRY UP IS THE WORD,THAT COMES TO MY MIND.HELP, PLEASE HELP,BECOME MY GUIDE.REMAIN WITHContinue reading “OH, LORD BE MY ANCHOR.”

कृष्णा कृष्णा।

कृष्णा कृष्णा… Written by वासल देवेन्द्र.. D.K.Vasalकृष्णा कृष्णा। सूरज निकले कह कृष्णा कृष्णा।डूबा चांद कह कृष्णा कृष्णा।सितारे हुये मद्धम कह कृष्णा कृष्णा।भोर हुई कह कृष्णा कृष्णा।पक्षी बोलें कहें कृष्णा कृष्णा।पवन चले कह कृष्णा कृष्णा। बाग़ भी बोले कृष्णा कृष्णा।पुष्प भी बोले कृष्णा कृष्णा।चारों ओर बस कृष्णा कृष्णा।हर ‘श’ में है बस कृष्णा कृष्णा। अन्न केContinue reading “कृष्णा कृष्णा।”

रंग लाल।… Written by वासल देवेन्द्र।…D.k.Vasal

रंग लाल।बहुत गहरा है ये रंग,नाम है इसका लाल रंग। खून का भी है रंग लाल।यूं ही नहीं सब कहते हम,बेटे अपने को मेरा ‘ लाल’। छिन जाये तो बहुत मलाल,मलाल में भी छिपा है ‘ लाल ‘।अग्नि में भस्म हो गया ‘ लाल ‘,विकराल अग्नि का रंग भी लाल। खुदा से गुस्सा तो आंखेंContinue reading “रंग लाल।… Written by वासल देवेन्द्र।…D.k.Vasal”

यादें…हर मुर्दा है ज़िंदा।

यादें…हर मुर्दा है ज़िंदा।…Written by वासल देवेन्द्र D.K.Vasal.यादें…हर मुर्दा है ज़िंदा। जिंदगी बस,यादों का डेरा।और क्या है यहां,तेरा और मेरा।हालात जब भी,डराते हैं मुझको।छिपा लेता है मुझे,यादों का घेरा। ये बस यादें ही हैं,जीने का सहारा।हों उजड़े चमन की,यां बरखें बहारां।हों सुखे मौसम की,यां बारिश की फुहारां। बिना यादों के,इन्सान कुछ भी नहीं।नां हों यादेंContinue reading “यादें…हर मुर्दा है ज़िंदा।”

सिर्फ सच केवल सच।

सिर्फ सच, केवल सच… Written by वासल देवेन्द्र..D.Vasalबहुत बहुत कड़वा सच,पुराणों की वाणी का सच।AN ABSOLUTE CHASTE TRUTHसिर्फ सच- केवल सच। सच लिखूंगा, सिर्फ सच,सच के सिवा, कुछ भी नहीं।ले लेना तुम, जान मेरी,अगर नहीं ये, केवल सच। कहते हैं खुद ईश्वर ही,और उनके अवतार सभी।कथांयें उनकी और लीला सभीदेती हमें सीख जीने की। सोचाContinue reading “सिर्फ सच केवल सच।”

‘ ण’

‘ ण ‘ ….. written by वासल देवेन्द्र…D.K.VASAL‘ ण ‘संस्कृत में ‘ण’ हिंदी में न,ज़रा ध्यान से देखो समझो,क्या कमाल का है ये ण। ण बिना हैं कृष्ण अधूरे,ण बिना अधूरे विष्णु,ण बिना नां नारायण,ण बिना नां कोई वैकुणठ।ण बिना अधूरा ब्रम्हाणड,ण बिना नां वेद उच्चारण,ण बिना नां कोई कल्याण। ण बिना नां कोई प्राणी,णContinue reading “‘ ण’”

कृष्णा ने खेली खून की होली।

कृष्णा ने खेली खून की होली।कृष्णा ने खेली खून की होली… Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasal.कृष्णा ने खेली खून की होली कृष्णा ने भी खेली होली,सब अपनों से खेली होली।कभी फूलों से कभी रंग से,कभी ख़ून से खेली होली। राधा संग रंगों से खेली,भक्तों संग फूलों से खेली।अपनों संग मुस्कान से खेली,महाभारत में खून से खेली।Continue reading “कृष्णा ने खेली खून की होली।”

SECRET ALWAYS IS THAT REASON.

SECRET ALWAYS IS THAT REASON…Written by …वासल देवेन्द्र.. DK.VASALSECRET ALWAYS IS THAT REASON SECRET ALWAYS ISTHAT REASON.NOTHING HAPPENSWITHOUT A REASON. NOTHING HAPPENSWITHOUT A REASON.WE ONLY WITNESSCHANGE OF SEASON.CHANGE OF SEASONHAS A REASON. KNOWING IT TO BEIRRATIONAL REASON.BELIEVES VASAL DEVENDERWITHOUT AN OPTION.THERE WAS A GOOD REASONFOR HIS SON’SEARLY EXTINCTION. GOOD OR BADIS A COLOUR OF REASON.BADContinue reading “SECRET ALWAYS IS THAT REASON.”

ओ कृष्णा।

ओ कृष्णा…. WRITTEN BY वासल देवेन्द्र..D.K.VASAL  ओ कृष्णा। है सुना भी और पढ़ा भी मैंने,जिसकी रही भावना जैसी,प्रभु मूरत देखी तिन तैसी। अनंत है तूं अनंत तेरी सूरत,समस्या है ये कृष्णा मेरी।किस रुप में देखूं सूरत तेरी,किस भाव से देखूं मूरत तेरी। बैठे कदम्ब के पेड़ पर देखूंयां बजाते तुम्हें बांसुरी देखूं।तुम्हें यमुना के तीर परContinue reading “ओ कृष्णा।”

कभी-कभी।

कभी कभी… Written by. वासल देवेन्द्र..D.K.Vasalकभी कभी।कभी कभी सोचता हूं,है अजीब जिंदगी उसकी।ना हो हवा तो नां जले चिरागहो तेज़ हवा तो नां जले चिरागवो हवा,जो दोस्त है उसकी,है वो ही दुश्मन भी उसकी। वो ख़ुदा,जो जान है हमारी,वो ही लेता है जान हमारी।जब जी में आया जला दी,जब जी में आया बुझा दी।वो नाज़ुकContinue reading “कभी-कभी।”

कहां लिखती है कलम कभी।

कहां लिखती है कलम कभी .. Written Byवासल देवेन्द्र..D.K. VASALकहां लिखती है कलम कभी। कहां लिखती है कलम कभी,भावनायें उमड़ती हैं कवि की,बन कर काग़ज़ पर स्याही।महसूस कर ले वो जिस अहसास को,वो हो जाती रचना उसकी,कहां लिखती है कलम कभी। रचना हो मासूम अगर,समझो दिल से है निकली।ले आये अगर आंख में आंसू,समझो रुहContinue reading “कहां लिखती है कलम कभी।”

आग।

आग (एक भयानक एहसास यां विरोधाभास)written by वासल देवेन्द्र…D.K.VASALआग।आग ।  आग । आग …कहां…,कैसे…किधर , किस ओर।घबराई हुई  नज़र ,देखे  चारों ओर,हुआ लाल पीला बसंती गगन,हुईं हो जैसे भोर।गर्म हवा और काला नाग,दिखता था सब ओर।था आग का सन्नाटा ,बाकी सब शोर ही शोर। डरा – सहमा  था हर कोई,देख अग्नि का विकराल रूप।होता हैContinue reading “आग।”

ओ ख़ुदा एक बार बस एक बार।

ओ ख़ुदा एक बार बस एक बार…. Written by वासल देवेन्द्र…..D.K.Vasal. ओ ख़ुदा,एक बार बस एक बार,बन कर आम इंसान तूं आ।खो अपनी औलाद को,फिर मुस्कुरा के दिखा।हंसेगा वासल देवेन्द्र तुझ पर,मार ठहाके बार बार।वादा है तुझसे मेरा ये,ओ मेरे ख़ुदा।कभी तो यूं खुद को भी,तूं ज़रा आज़मा। मैं नहीं जानता,क्या तेरी जन्नत में,है सबसेContinue reading “ओ ख़ुदा एक बार बस एक बार।”

आंख मिचौली।

आंख मिचौली….. Written by वासल देवेन्द्र…D.K. Vasal.आंख मिचौली । खेलता रहता है मेरा खुदा भी,मुझसे आंख मिचौली।है उसका ये खेल भी निराला,मैं ढूंढता हूं तो वो,छिप जाता है।मैं छिप जाऊं तो वो ,नज़र नही आता। मैं कुछ भी नही ,पर उसकी नज़र में हूं ।वो सब जगह है ,फिर भी नज़र नही आता।यां तो वोContinue reading “आंख मिचौली।”

बहुत भोला है इन्सान।

बहुत भोला है इन्सान.. Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasal बहुत भोला है इन्सान,नही निकला,रोशनी की तलाश में।जब तक,अंघेरा नां मिला राह में। मासूम बहुत है इन्सान,कद्र बहुत  कुदरत की करता है।सूरज को चढ़ाता जल,धरती को करता नमन।रहता हवाओं के रुख में,पुकारता नदियों को मां हर पल। नदियां जो तोड़ें संयम,खुद को दोष देता है।आंधियों को भीContinue reading “बहुत भोला है इन्सान।”

ये ज़रूरी तो नहीं।

ये ज़रूरी तो नहीं…. Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasalये ज़रूरी तो नहीं। सम्भाल कर रखना,ज़िन्दग़ी के हर लम्हें को।हर अगले लम्हें में हो ज़िन्दग़ी,ये जरूरी तो नही। माना हर रात की,होती है सुबह।हर कोई देख पाये हर सुबह,ये ज़रूरी तो नहीं। हैं बहुत दर्द मेरे सीने में,खुद़ा देखे मेरे हर दर्द को।हर बार,ये ज़रूरी तो नहीं।Continue reading “ये ज़रूरी तो नहीं।”

झूठी थी बचपन की कहानी।

झूठी थी बचपन की कहानी… Written by…वासल देवेन्द्र D.k. Vasal. दादी ने सुनाई थी जो कहानी,झूठी थी वो बचपन की कहानी।एक था राजा एक थी रानी,दोनों मर गये खत्म कहानी।वासल देवेन्द्र ने देखी और जानी,वो बतलाता है वही कहानी। एक था राजा एक थी रानी,दोनों मिले शुरू हुई कहानी।एक हुआ बेटा एक हुई कन्या,राजा रानीContinue reading “झूठी थी बचपन की कहानी।”

बस ढूंढता रहता हूं मैं।

बस ढूंढता रहता हूं मैं।महीने हो चुके अब तो दो….. वासल देवेन्द्र… Written by D.K.Vasal महीने हो चुके अब तो दो,सोचते होगे तुम सब तो।सम्भल गया होगा वासल देवेन्द्र,हो गया होगा चुप रो रो कर वो। नहीं नहीं नहीं है ये सच,हर पल रहते आंसू पलकों पर।बहता रहता है एक झरना,हवा के झोंके से हिलContinue reading “बस ढूंढता रहता हूं मैं।”

ताश के पत्ते।

ताश के पत्ते…. Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasal.ताश के पत्ते। बाटंता है ख़ुदा मुकद्दर ऐसे,जैसे बंटते हैं ताश के पत्ते।उठा कर गड्डी मुकद्दर की,और काट के उसे प्यार से।बिना करे फिर फर्क कोई,बांटता जैसे ताश के पत्ते। कोई नही जान पाता कभी,क्या मिलेंगे उसको पत्ते।गुलाम, बादशाह, बेगम,ईका यां  फिर छोटे पत्ते। रंग बिरंगे मिलेंगे पत्ते,यां मिलेंगेContinue reading “ताश के पत्ते।”

कौन था वो?

कौन था वो… Written by वासल देवेन्द्र.. D. K. Vasalकौन था वो। पूछा मैंने एक ग्वाले से एक दिन,कैसे पहचानते हो गायें अपनी तुम।इन सैंकड़ों-हजारों गायों की भीड़ में,बोला वो ग्वाला तब मुझसे।जैसे इन लाखों की भीड़ में,पहचानते अपने बच्चे तुम। मैंने बोला,हर चेहरा होता हमारा अलग,ऐसे पहचानते अपने बच्चे हम।ग्वाला बोला,तुम देखो अगर नज़रोंContinue reading “कौन था वो?”

विश्वास नहीं होता है कृष्णा।

KINDLY KINDLY READ AND CIRCULATE AS MUCH AS POSSIBLE TO HELP ME.विश्वास नहीं होता है कृष्णा। विश्वास नहीं होता है कृष्णा… Written by वासल देवेन्द्र…D.K.Vasal.विश्वास नहीं होता है कृष्णा। सच कहता हूं कृष्णा तुझसे,झूठ नही कह सकता मैं।विश्वास नहीं होता है मुझको,व्यवहार किया जो तुने मुझसे। ज़ुबान नहीं थकती थी मेरी,कृष्णा कृष्णा कहते कहते।पागल साContinue reading “विश्वास नहीं होता है कृष्णा।”

डर लगता है डर लगता है।

डर लगता है डर लगता है… Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasalडर लगता है डर लगता है।छलनी कर गया सीना मेरा,दे गया मुझे वो घाव जितने।भीष्म को नां मारे होंगे,अर्जुन ने भी बाण इतने। हर घाव रोता है बारी बारी,है रिसता रहता ज़ख्मो से,हर दम ये ख़ून मेरा।सब देखो, सब देखो,कितना हूं बेशर्म बाप।देख लाश बेटे कीContinue reading “डर लगता है डर लगता है।”

ग़लत समय तुम आये कृष्णा।

ग़लत समय तुम आये कृष्णा.. Written by वासल देवेन्द्र.. D.K.Vasalगलत समय तुम आये कृष्णा,आना था तुम्हें कलियुग में।तुमने चुना एक अर्जुन,जो समझ नां पाया तुम्हारा ज्ञान।हो गया वो पूरा ही विचलित,एक अभिमन्यु के मरने से। यहां हर घर में रहता है अर्जुन,हर पल मरें अभिमन्यु यहां।सम्भाल लिया तुमने अर्जुन को,करने से  आत्मघात वहां।कौन सम्भाले यहांContinue reading “ग़लत समय तुम आये कृष्णा।”

छोड़ो मोह के धागे।

छोड़ो मोह के धागे… WRITTEN BY वासल देवेन्द्र..D.K.Vasalछोड़ो मोह के धागे। सब कहते हैं भूल जाओ अब,और बढ़ो तुम आगे।शायद वो नहीं जानते,क्या होते हैं मोह के धागे।होते दायरे छोटे मोह के,पर मजबूत होते हैं उसके धागे। बचपन से कहते बढ़ाओ मोह अपनों में,फर्क है जो गैरों में अपनो में,बस फर्क उतना ही प्यार औरContinue reading “छोड़ो मोह के धागे।”

बस बदनाम है नाम मेरा।

बस बदनाम है नाम मेरा… Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasal बस बदनाम है नाम मेरा। है चीज़ एक मैंने जाना,जो रहती हर दम हर जगह।नां अपना, पराया नां दोस्त उसका,हर ‘श’ पर है राज उसका। हर  शाम , सहर , दरबार उसका,हो वक्त जैसे ग़ुलाम उसका।कोई घर-बार नां कोई शहर उसका,नां धर्म, अधर्म है कर्म उसका।Continue reading “बस बदनाम है नाम मेरा।”

आईने से झूठ बोलने का हुनर।

आईने से झूठ बोलने का हुनर.. Written by वासल देवेन्द्र.. D.K.Vasalआईने से झूठ बोलने का हुनर। कहा किसी ने मुझसे,है जिंदगी आईने की तरहां।वो तभी मुस्कुराएगी,जब  मुस्कुराओगे तुम अपनी तरहां। ये बात नही है कोई नई,हैं जानते ये हम सभी।पर सच तुम भी,जान लो अभी।नहीं झूठ बोलता,आईना कभी। नहीं छिपा सकते हम,खुद से खुद को,करेंContinue reading “आईने से झूठ बोलने का हुनर।”

सांप–सीड़ी।

सांप –सीढ़ी.. Written by वासल देवेन्द्र..D.K.Vasal                    (सांप — सीढ़ी)जाने अंजाने      ,ही सही,खेलती है          ,हर पीढ़ी।खेल सांप          ,सीढ़ी का,चढ़ते हैं उपर     ,तेज़ी से,   ले सहारा          ,सीढ़ी का।करते है नाज़     ,खुद पर,जैसे हो हुनर     ,इस पीढ़ी का। खेलते हैं खेल   ,पासे से,दे नतीजा        ,हाथ भाग्य के।उछलते हैं       ,आने पे छः,भूल पक्ष(sides) ,पासे के छः। हैं चढ़ता कोई         Continue reading “सांप–सीड़ी।”

काला टीका।

काला टीका… Written by वासल देवेन्द्र..D.K. VASAL.काला टीका। कहां माना मैंने कभी,काले टीके का चलन।कहां जाना मैंने कभी,ऩजर उतारने का ऱाज।नां जाने क्यों दिल करता है,सब कुछ मानने को आज। अक्सर सुना है लोगों से कहते,उतार दो इसकी नज़र।लगा दो इसे काला टीका,लग जाये नां इसे किसी की नज़र। किसकी लगती है नज़र और क्यों?कौनContinue reading “काला टीका।”

क्या अर्जुन समझ पाया गीता को?

नहीं! नहीं! अर्जुन नहीं समझ पाया गीता को।.Written by..वासल देवेन्द्र..D.K. Vasal. Kindly forward as much as possible. यदि मैं साबित नां कर पाया,कि अर्जुन नहीं समझ पाया गीता को।तो काट देना तुम गर्दन मेरी,सोच ये नीच कंहा से आया। यदि कर दिया साबित मैंने,कि अर्जुन नहीं समझ पाया गीता को।तो कृपा करके नां देना ज्ञानContinue reading “क्या अर्जुन समझ पाया गीता को?”

अधूरी कहानी

अधूरी कहानी . written by वासल देवेन्द्र..D.k.Vasalअधूरी कहानी कुदरत को जो करना है,कुदरत वो करके रहती है।एक मौज जो नाज़ुक कश्ती को,तुफ़ान से बचा कर ले आये।कुदरत ने तमाशा करना हो,साहिल (किनारा) पे डूबो के रहती है। हम हंस लें यां रों लें जितना भी,कुदरत तो बहरी होती है।लिखा खुद वासल देवेन्द्र ने,अपनी कविता ख़ामोशीContinue reading “अधूरी कहानी”

क्या वक्त भुला देता है ग़म।

क्या वक्त भुला देता है ग़म.. written by..वासल देवेन्द्रD.k.Vasal. क्या वक्त भुला देता है गम। कुछ दिन पहले बोया         ,बीज एक दर्द ने,अब फैल गई उसकी जड़ें    ,शरीर के हर अंग में।दर्द दिया हो गैर ने             , तो संभाल लेता है वक्त,दर्द हो अगर लाडले का      , तो और हवा देता है वक्त। वक्त भुलाContinue reading “क्या वक्त भुला देता है ग़म।”

ख़ुदा की करेंसी

WRITTEN BY …वासल देवेन्द्र..D.K.Vasal         ( ख़ुदा की करेंसी)आंसू जो आंख से टपका     , वो पानी नही है,है हकीकत हमारे दर्द की     , कोई कहानी नही है।आते नहीं आंसू                  , बेवज़ह कभी,कोई तो है वज़ह                ,जो आंख नम पड़ी। पूछा किसी ने हमसे           ,क्या गुज़री है घड़ी,रफ़्तार आंसुओं की           ,तब और थी बढ़ी।लगता था  ऐसे जैसे         Continue reading “ख़ुदा की करेंसी”

अक्षर ढाई…2.. दर्द.. Written by वासल देवेन्द्र..D. K.Vasal

अक्षर ढाई—2– दर्द।हर तरहां के लिखे “अक्षर ढाई” ,वासल देवेन्द्र ने कविता “अक्षर ढाई “में।बस “दर्द” ही लिखना भूल गया,हो नाराज़ वो मुझको डस गया। है पुत्र भी ढाई अक्षर का,और पितृ भी ढाई अक्षर का।कब पुत्र बन गया पितृ मेरा,मुझे ज़रा पता नही चला। है गंगा भी ढाई अक्षर की,और पिंड भी ढाई अक्षरContinue reading “अक्षर ढाई…2.. दर्द.. Written by वासल देवेन्द्र..D. K.Vasal”

कृष्ण भक्त और दर्द

कृष्ण भक्त और दर्द.. Written by..वासल देवेन्द्र..D. K. Vasalकृष्ण भक्त और दर्द। भक्ति करने वाले समझ लें,भक्ति सागर के किनारे नही।रहें डूबने को हर पल तैयार,इस राह में कोई सहारे नही। ये राह है कांटों से भरी,नही रहती यहां कोई घास हरी।उम्मीदें रह जाती हैं धरी,हर घड़ी होती है दर्द भरी। मिलता है इतना दर्दContinue reading “कृष्ण भक्त और दर्द”

खुदा का खंजर

खुदा का खंजर। ख़ुदा का खंजर…. WRITTEN BY ..वासल देवेन्द्रखुदा का खंजर,गलती से चल गया उसका खंजर,रो रहा है ख़ुदा आसमान में बहुत,देख कर भक्त के घर का मंजर। खड़ा है दरवाजे पर हो कर शर्मसार,सुन रहा है चीखें और भक्तों की पुकार।हिम्मत नही जुटा पाता आने की घर के अन्दर,वो जानता है सब कुछContinue reading “खुदा का खंजर”

श्मशान वैराग्य… Written by वासल देवेन्द्र…D.K.Vasal

कभी ना कभी होता सब का,थोड़ा बहुत मन वैराग्य।कभी कभी शमशान जो जाओ,होता है शमशान वैराग्य। मन सब का होता उश्चाट,थोड़ा बहुत शमशान में जा के।गुलमिल जाते वापस आकर,फिर अपने संसार में आके। हां गुलना मिलना भी है जरूरी,हैं जब तक बची हमारी सांसें।पर मत भूलो महसूस करना,लगा था जो शमशान में जा के। भागोContinue reading “श्मशान वैराग्य… Written by वासल देवेन्द्र…D.K.Vasal”

GREY FAITH

Written by वासल देवेन्द्र….D.K.VasalGREY FAITH PRAYER TO THE LORD,WITH SUBTLE AND DOUBTED WILL,WITH INCENSE STICK IN HAND,AS IF A PIOUS FRILL,BELIEVE YOU ME OR NOT,IS NOTHING BUT A DRILL. UNSHAKEN FAITH IN LORD,IS NOT A SIMPLE THOUGHT,IN FAITH NO ONE WAILS,AND STANDS LIKE A ROCK,THAT KIND OF FAITH,DARES TO MOVE’ MOUNTAINS. FAITH MOVES MOUNTAINS,NARRATED FROMContinue reading “GREY FAITH”

मारेंगे सुई चुभा चुभा के

WRITTEN BY D K VASAL.. वासल देवेन्द्र। मारेंगे सुई चुभा चुभा के ये दुनिया अजीब सराये ( INN ) फानी ( which has certain end) देखी, हर चीज़ यहां की आनी जानी देखी, जो जा कर नां आये वो जवानी देखी दे जो आ कर नां जाये वो बुढ़ापा देखा। पर ये अजीब दौर अबContinue reading “मारेंगे सुई चुभा चुभा के”

बोली की होली

बोली की होली। WRITTEN BY D.K.VASAL..वासल देवेन्द्र। बोली की होली आओ खेलें हम सब होली, इस बार खेलें, बोली की होली। होली है रंगों की टोली, हों जहां रंग होती वहां होली। चलो खेलें बोली की होली, थोड़ा हटकर खेलें इस बार की होली। हम ध्यान नहीं करते पर दिन भर, हम हर दम खेलतेContinue reading “बोली की होली”

हमारी प्यारी अनन्या।

WRITTEN BY D.K.VASAL…वासल देवेन्द्र। My granddaughter ANANYA’S birthday today. हमारी प्यारी अनन्या। अनन्या नहीं कोई आम कन्या, है अदभुत बहुत हमारी अनन्या। अनन्या का मतलब है अनंत, है सचमुच में अनन्त अनन्या ‌। पड़ने लिखने में श्रेष्ठ अनन्या, खेल कूद में तेज अनन्या। चित्रकारी में निपुण अनन्या, जो हम सब की है प्यारी अनन्या। मम्मीContinue reading “हमारी प्यारी अनन्या।”

कन्या की दुश्मन कन्या ।

Written by D.K.Vasal…..वासल देवेन्द्र। कन्या की दुश्मन कन्या, है वो घर धन्या ,जहां होती कन्या, द्रोपदी से जानों द्रुपद को। और जनक को जानकी से, विवेक बड़े अहंकार घटे, हो जिस घर में भी कन्या। कन्या ने जनमा मर्द को, और मर्द भी हो गया धन्य। मां मिल गई जैसे ईश्वर, है मां भी उसकीContinue reading “कन्या की दुश्मन कन्या ।”

WOMENS’ DAY, Men are mean I would say,

WOMEN S’ DAY ( DEDICATED TO ALL WOMEN) WOMENS’ DAY (DEDICATED TO ALL WOMEN) Written by D.k.Vasal.. वासल देवेन्द्र। Men are mean I would say, They celebrate a WOMENS’ DAY. Where is a day ? when woman is away, Every day is a WOMENS’ DAY. A man may live a long long life, He isContinue reading “WOMENS’ DAY, Men are mean I would say,”

अगर पलकें मेरी कम पड़ी

Written by D. K. Vasal …वासल देवेन्द्र। अगर पलकें मेरी कम पड़ी, अजीब होते हैं ,दिल के रिश्ते भी, कभी बच जाते हैं ,कांटों पर। कभी छिल जाते हैं ,मखमल पर जुड़ जाते हैं पल में ,और बिखर जाते भी। रहते हैं जिंदा ,मुलायम शब्दों पर, सजाना पड़ता है , नाज़ुक पलकों पर। मर जातेContinue reading “अगर पलकें मेरी कम पड़ी”

धीरे धीरे

Written by D.K.Vasal….वासल देवेन्द्र धीरे धीरे है सृष्टि का संदेश चलो तुम धीरे धीरे, चलती है धरती भी धीरे धीरे। ढलता है सूरज भी धीरे धीरे, टिमटिमाते हैं तारे भी धीरे धीरे। होती है भोर भी धीरे धीरे। धड़कता है दिल भी धीरे धीरे, चलती हैं सांसें भी धीरे धीरे। फिसलता है बचपन भी धीरेContinue reading “धीरे धीरे”

हिंसा

हिंसा Written by D. k. Vasal- वासल देवेन्द्र हिंसा हैं हिंसा करने के ,कई ढंग, हिंसा नही ,बस तोड़ना अंग। है हिंसा करना ,शान्ति भी भंग, इच्छा ना हो ,पूरी जब, हिंसा करता ,हर कोई तब। रोना चिल्लाना ,मचाना शोर, पाने को वस्तु ,यां प्यार, ये सब हिंसा के ,हथियार। शब्दों की है ,हिंसा गहरी,Continue reading “हिंसा”

मैं और मेरी “मैं”

Written by D.K. Vasal..वासल देवेन्द्र। मैं और मेरी “मैं” तुम तराशोगे ,अगर मुझमें, हैं तराशते ,हीरा जैसे। आयेंगी नज़र ,तुम्हें खूबी ही मुझमें, तुम तलाशोगे ,अगर मुझमें, हैं तलाशते ,ख़ामी जैसे, आयेगी नज़र ,तुम्हें कमी ही मुझमें। मैं क्या हूं ,कुछ भी नहींं, तुम तराशो मुझे ,यां तलाशो मुझे। हूं मैं कुछ ,भी नहीं, बसContinue reading “मैं और मेरी “मैं””

प्रारब्ध यां दो हाथ।

प्रारब्ध यां दो हाथ Written by D.K.Vasal-वासल देवेन्द्र प्रारब्ध यां दो हाथ वक्त ने दिया जो साथ हमेशां, ना आयेगा कोई तज़ुर्बा हाथ। ज़रुरत पड़ी अचानक जब, रह जाओगे मलते हाथ। हैं लकीरें किस्मत की सबके हाथ, है संवारना उनको अपने हाथ। है मेहनत करना अपने हाथ, नां रहो बैठे रख हाथ पर हाथ। छोड़ाContinue reading “प्रारब्ध यां दो हाथ।”

MIGRANT POOR SOULS

WRITTEN BY D K VASAL—वासल देवेन्द्र DEDICATED TO MIGRANT POOR SOULS. They walked, walked, walked and walked. The life seemed short, the road seemed long. I saw them fighting every inch. Beating distance, fighting thirst , putting hunger to clinch. The old one tired, the young one thirsty, the little one hungry. The sun wasContinue reading “MIGRANT POOR SOULS”

रिश्तों का सच

WRITTEN BY D K VASAL–वासल देवेन्द्र रिश्तों का सच मैं सच कहता हूं, हमेशां सच कहता हूं। नहीं बोलता झूठ कभी, हैं हर पल कहते हम सभी। थामा मैंने जो एक बार, नही छोड़ूंगा फिर वो हाथ। मैं जीता हूं अपनों के लिए, मरुंगा मैं अपनों के साथ। थरथरा गया अब तो झूठ, सच होContinue reading “रिश्तों का सच”